
In near future, a cooperative taxi service will be started, in which registration of two wheelers, taxis, rickshaws and four wheelers will be possible and the profit will go directly to the driver.
Union Home Minister and Minister of Cooperation Shri Amit Shah gave this information while replying to the discussion on Tribhuvan Sahkari University Bill, 2025 in the Lok Sabha.
Based on principles of “Sahakar se Samriddhi”, a taxi-service cooperative will be formed by willing taxi drivers and the management will rest with the members of such society.
The objective of this initiative is to ensure democratic management by active participation of all members and to ensure that maximum profit earned by such cooperative taxi society is distributed equitably among the taxi drivers who will be members of that society.
Such an initiative will lead to overall prosperity and improving the income, working conditions, and standard of living for such taxi drivers/members of the cooperative society while providing better services to the consumers.
Sahkar or Cooperation is a concept where a group of people voluntarily come together and form a cooperative society or Sahkari society based on mutual benefit and common economic interest. Sahkari models of economic cooperation have been found to be more fruitful for its members, being more equitable and resulting in inclusive growth for all, like in the case of Amul.
सहकारिता मॉडल पर टैक्सी सेवा जल्द ही शुरू होगी, यह क्यों खास है?
कुछ महीनों में एक बहुत बड़ी सहकारी टैक्सी सेवा शुरू की जाएगी, जिसमें दोपहिया वाहन, टैक्सी, रिक्शा और चौपहिया वाहनों का पंजीकरण संभव होगा और लाभ सीधे चालक को मिलेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025 पर चर्चा का उत्तर देते हुए यह जानकारी दी।
सहकार से समृद्धि के सिद्धांत पर एक सहकारी टैक्सी सेवा इच्छुक टैक्सी चालकों द्वारा बनाई जाएगी और इसका प्रबंधन उसके सदस्यों के पास होगा। इस पहल का उद्देश्य सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी से लोकतांत्रिक प्रबंधन सुनिश्चित करना और ऐसी सहकारी टैक्सी सोसाइटी द्वारा अर्जित अधिकतम लाभ को उस सदस्य टैक्सी चालकों के बीच समान रूप से वितरित करना है।
इस तरह की पहल से समग्र समृद्धि आएगी और टैक्सी चालकों/सहकारी समिति के सदस्यों की आय, कार्य परिस्थितियाँ और जीवन स्तर में सुधार के साथ ही उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएँ भी प्रदान की जाएंगी।
सहकार या सहकारिता एक ऐसा सिद्धांत है, जिसमें लोग स्वेच्छा से एकत्रित होकर एक सहकारी समिति बनाते हैं, जो आपसी लाभ और समान आर्थिक हितों पर आधारित होती है और अमूल की तरह सबके लिए समावेशी विकास लाता है।