
Today (March 20) is World Sparrow Day-2025. Due to rapid urbanization and changing environment, sparrows, which were once the identity of our homes, are now on the verge of extinction. But in this era, the Kale family, resident of Dadaji Ward of Khandwa, Madhya Pradesh has set an example, which has again raised the hope that if we want, nature and animals can be saved.
Mukesh Kale and his family have made the roof of their house such a safe shelter for sparrows, where today more than 30 sparrows have made their nest. This initiative of the Kale family is not only an example of environmental conservation, but has also become an effort to give a new direction to the society.
Mukesh Kale says that he had prepared a garden on his roof after working hard for ten years and started keeping millet and water bowls for the sparrows. Slowly the sparrows started returning and now their number has increased to more than 30. Family member Purnima Kale says, “Every morning we wake up to the chirping of sparrows. They have become a part of our family. In the evening they return to the roof, as if they consider it their home.”
Happiness also returned with sparrows
Mukesh Kale, his wife Purnima, sons Aditya and Atharva all remain busy taking care of the sparrows. Now these birds fly around fearlessly among the family. The Kale family believes that ever since the sparrows came to their house, happiness also returned with them. Mukesh Kale says, “Sparrows have become a symbol of auspiciousness for us. There is always a good atmosphere in our house due to their arrival.”
Wooden houses serve as nests
Mukesh Kale has named his roof as ‘Man Garden’. Here small plants have been specially planted so that sparrows can get a natural environment. Also, a special iron stand has been prepared, in which wooden houses have been prepared. There is always a provision of food and water on the roof. In summer, there are shady places and water bowls for birds.
Paradise for other birds also
This garden has become a paradise not only for sparrows, but also for other birds. Gram, rice, millet and wheat are kept on the roof so that any hungry bird can come there and eat. Mukesh Kale’s friend Hemant Morane says, “Mukesh Bhai has proved that even small efforts can bring big changes.”
An inspiration for Khandwa
This initiative of Kale family is an inspiration for all those who are serious about environment and bird conservation. Due to the hard work of this family, not only have sparrows returned, but this work has also become an example for future generations. This story becomes even more inspiring when the friends and relatives of the Kale family also come to see their Man Garden.
Manohar Lal Morane, Hemant Morane and others are very happy when they see the small houses on the roof, the arrangement of food and water and the chirping of sparrows. Everyone appreciates this effort and says that it is truly a paradise for birds. His friends believe that what Mukesh Kale and his family have done is an inspiration for the entire Khandwa. Such small efforts can also make the environment around us alive.
All auspicious works and events also take place in Man Garden. Be it the birthday of family members or a wish for any other auspicious occasion, all events take place in this garden. Mukesh Kale says, “Now every festival of ours begins with giving food and water to sparrows and other birds. This has become our biggest worship and tradition.
Today on World Sparrow Day, it is important that we also create a safe place for sparrows in our homes. With just a little effort and sensitivity, we can return these little birds to our courtyard again. The story of the Kale family shows that returning to nature is in our own hands.
विश्व गौरैया दिवस-2025: गौरैया संरक्षण की मिसाल बना खंडवा का काले परिवार; सालो की मेहनत से बनाया घर की छत पर गार्डन पक्षियों का स्वर्ग, 30 से अधिक गौरैयाओं का बसेरा
आज (20 मार्च) विश्व गौरैया दिवस है। तेजी से हो रहे शहरीकरण और बदलते पर्यावरण के कारण गौरैया, जो कभी हमारे घरों की पहचान थी, अब विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी है। लेकिन इसी दौर में खंडवा के दादाजी वार्ड निवासी काले परिवार ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिससे यह उम्मीद फिर जगी है कि अगर चाह लें तो प्रकृति और जीवों को बचाया जा सकता है।
मुकेश काले और उनके परिवार ने अपने घर की छत को गौरैयाओं के लिए ऐसा सुरक्षित आश्रय बना दिया है, जहां आज 30 से अधिक गौरैयाएं अपना बसेरा बना चुकी हैं। काले परिवार की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि समाज को एक नई दिशा देने वाला प्रयास भी बन गया है।
सुबह की अलार्म बन गई गौरैयाओं की चहचहाहट
मुकेश काले बताते हैं कि उन्होंने अपनी छत पर दस सालो की मेहनत से गार्डन तैयार कर गौरैयाओं के लिए बाजरा और पानी के सकोरे रखना शुरू किया था। धीरे-धीरे गौरैयाएं लौटने लगीं और अब उनकी संख्या 30 से भी अधिक हो गई है। परिवार की सदस्य पूर्णिमा काले कहती हैं, “हर सुबह हम गौरैयाओं की चहचहाहट से उठते हैं। ये हमारे परिवार का हिस्सा बन गई हैं। शाम होते ही ये लौटकर छत पर आ जाती हैं, जैसे अपना घर समझती हों।”
गौरैयाओं ने अपनाया काले परिवार को
मुकेश काले, उनकी पत्नी पूर्णिमा, बेटे आदित्य और अथर्व सभी गौरैयाओं की देखभाल में जुटे रहते हैं। अब ये पक्षी परिवार के बीच निर्भीक होकर उड़ती-फिरती हैं। काले परिवार का मानना है कि जब से गौरैयाएं उनके घर आईं, तब से खुशियां भी उनके साथ लौट आईं। मुकेश काले कहते हैं, “गौरैयाएं हमारे लिए शुभता का प्रतीक बन गई हैं। इनके आने से हमारे घर में हमेशा अच्छा माहौल रहता है।”
मन गार्डन में मिला गौरैयाओं को सुरक्षित घर
मुकेश काले ने अपनी छत को ‘मन गार्डन’ का नाम दिया है। यहां खास तौर पर छोटे-छोटे पौधे लगाए गए हैं ताकि गौरैयाओं को प्राकृतिक वातावरण मिल सके। साथ ही एक विशेष लोहे का स्टैंड तैयार कराया गया है, जिसमें लकड़ी के घर बनाए हैं। छत पर हमेशा दाना-पानी की व्यवस्था रहती है। गर्मी के दिनों में पक्षियों के लिए छायादार स्थान और पानी के सकोरे भरे रहते हैं।
सिर्फ गौरैया नहीं, हर पक्षी का है स्वागत
यह गार्डन न सिर्फ गौरैयाओं के लिए, बल्कि अन्य पक्षियों के लिए भी स्वर्ग बन गया है। छत पर चना, चावल, ज्वार और गेहूं रखा जाता है ताकि कोई भी भूखा पक्षी वहां आकर भोजन कर सके। मुकेश काले के मित्र हेमंत मोराने बताते हैं, “मुकेश भाई ने यह साबित कर दिया कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।”
खंडवा के लिए प्रेरणा बना काले परिवार का प्रयास
काले परिवार की यह पहल उन सभी के लिए प्रेरणा है जो पर्यावरण और पक्षी संरक्षण को लेकर गंभीर हैं। इस परिवार की मेहनत से न केवल गौरैया फिर से लौट आई है, बल्कि यह कार्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल बन चुका है। यह कहानी और भी प्रेरणादायक हो जाती है जब काले परिवार के मित्र और रिश्तेदार भी उनके मन गार्डन को देखने आते हैं। मनोहर लाल मोराने, हेमंत मोराने सहित अन्य लोग जब छत पर लगे छोटे-छोटे घर, दाना-पानी की व्यवस्था और गौरैयाओं की चहचहाहट देखते हैं, तो बेहद खुश होते हैं।
सभी इस प्रयास की सराहना करते हैं और कहते हैं कि यह सच में पक्षियों का स्वर्ग है। उनके मित्रों का मानना है कि मुकेश काले और उनके परिवार ने जो किया है, वह पूरे खंडवा के लिए प्रेरणा है। ऐसे छोटे-छोटे प्रयास हमारे आसपास के पर्यावरण को भी जीवंत बना सकते हैं।
सभी शुभ कार्य और आयोजन भी मन गार्डन में ही होते हैं। परिवार जनों का जन्मदिन हो या किसी और शुभ अवसर की मन्नत, सभी आयोजन इसी गार्डन में होते हैं। मुकेश काले बताते हैं, “अब हमारे हर उत्सव की शुरुआत गौरैयाओं और अन्य पक्षियों को दाना-पानी देने से होती है। यही हमारी सबसे बड़ी पूजा और परंपरा बन गई है।
विश्व गौरैया दिवस पर संकल्प
आज विश्व गौरैया दिवस पर यह जरूरी है कि हम भी अपने घरों में गौरैयाओं के लिए सुरक्षित जगह बनाएं। बस थोड़ी सी कोशिश और संवेदनशीलता से हम इन नन्हीं चिड़ियों को फिर से अपने आंगन में लौटा सकते हैं। काले परिवार की कहानी यह दिखाती है कि प्रकृति की ओर लौटना हमारे ही हाथों में है।