
A meeting regarding Dinosaur National Park and Sardarpur Wildlife Sanctuary was held in the Indore Divisional Commissioner’s office under the chairmanship of Indore Divisional Commissioner Shri Deepak Singh. Dhar Collector Shri Priyank Mishra, Deputy Commissioner Mrs. Sapna Lovanshi, District Forest Divisional Officer along with Panchayat and Forest Department officials participated in this meeting held through video conferencing.
In the meeting, Divisional Commissioner Shri Singh said that Dinosaur National Park will be built in Bagh tehsil of Dhar district. Borkuri, Risajala, Bayadipura (Padalia) and Gangkui (Jamaniyapura) villages are around this park. This National Park is also under the Eco Sensitive Zone like other National Parks. This area is also a protected area from the point of view of wildlife conservation and environment.
This National Park will be between Bhopal and Meghnagar Road. It will be 95 km from Meghnagar railway station, 152 km from Indore railway station and 350 km from Bhopal railway station. Around this national park there are Badkeshwar Mahadev temple, Hanuman temple, historical garden caves and forts, which will attract tourists to come here.
This national park will have thousands of species of Ayurvedic and medicinal trees including Sheesham, Neem, Amla, and also wild animals like jackal and fox.
This park will also attract large number of tourists. Currently more than 15 thousand tourists come here every year. After the park is built, the number of tourists will increase rapidly. The best time to visit this area is from October to December. At that time three to four times more tourists come. The number also increases on weekends.
Divisional Commissioner Mr. Singh said that while making the Dinosaur National Park, full care will be taken that the rights of the tribal society are not violated. Because the tribal society is in majority in this area. Therefore, special attention will be paid to their traditions, festivals, celebrations etc.
Special attention will be paid to nature conservation through the park. Such activities will be carried out near the park which will not harm nature and will also provide employment to the tribal society. Bagh print will be promoted in the area and skill development of the youth will be done.
Sardarpur Wildlife Sanctuary was also discussed in detail in the meeting. This wildlife sanctuary will also be under the eco-sensitive zone. This wildlife sanctuary will have various types of wildlife such as fox, monkey, langur, jackal and various types of birds. Especially the Kharmor bird will be protected. Kharmor birds are especially found in this area.
There will be a huge range of many trees and plants like teak, babool, palash, anjan here. Special attention will be paid to the environment in the sanctuary. Special efforts will be made to attract tourists. Sardarpur Wildlife Sanctuary will prove to be an important center from the point of view of Malwa and Nimar. It can become an important center for learning for the students of zoology. The concerned officials also put forward their suggestions in the meeting.
धार जिले में बनेगा डायनोसोर नेशनल पार्क एवं सरदारपुर वन्यजीव अभ्यारण्य; जानिए क्या होंगी उनकी अनोखी खूबियां और आकर्षण
इन्दौर संभागायुक्त श्री दीपक सिंह की अध्यक्षता में संभागायुक्त कार्यालय में डायनोसोर नेशनल पार्क एवं सरदारपुर वन्यजीव अभ्यारण्य के संबंध में बैठक सम्पन्न हुई। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में धार कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्र, उपायुक्त श्रीमती सपना लोवंशी, जिला वन मंडलाधिकारी सहित पंचायत एवं वन विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में संभागायुक्त श्री सिंह ने बताया कि धार जिले के बाग तहसील में डायनोसोर नेशनल पार्क बनेगा। इस पार्क के चारों और बोरकुरी, रिसावाला, बयादीपुरा (पाडलिया) और गंगकुई (जामनियापुरा) ग्राम हैं। यह नेशनल पार्क भी अन्य नेशनल पार्कों की तरह इको सेंसेटिव झोन के अंतर्गत है। यह क्षेत्र वन्य जीव संरक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से भी संरक्षित क्षेत्र है।
यह नेशनल पार्क भोपाल और मेघनगर रोड़ के बीच में होगा। मेघनगर रेल्वे स्टेशन से इसकी दूरी 95 किलो मीटर होगी, जबकि इंदौर रेल्वे स्टेशन से 152 किलो मीटर और भोपाल रेल्वे स्टेशन से दूरी 350 किलो मीटर होगी।
इस नेशनल पार्क के आसपास बड़केश्वर महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर, ऐतिहासिक बाग गुफाएं और किले हैं, जो पर्यटकों को यहां आने के लिये आकर्षित करेंगे। इस नेशनल पार्क में शीशम, नीम, आंवला सहित हजारों प्रजातियों के आयुर्वेदिक एवं औषधीय पेड़ होंगे, वहीं सियार, लोमड़ी जैसे वन्य जीव भी होंगे।
पर्यटकों की दृष्टि से भी यह पार्क सबको लुभाएगा। वर्तमान में यहां सालाना 15 हजार से अधिक पर्यटक आतें है। पार्क बन जाने के बाद पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। इस क्षेत्र में घूमने का सबसे श्रेष्ठ समय अक्टूबर से लेकर दिसम्बर तक का होता है। उस समय तीन-चार गुना अधिक पर्यटक आतें हैं। वीकेंड पर भी संख्या बढ़ जाती है।
संभागायुक्त श्री सिंह ने बताया कि डायनोसोर नेशनल पार्क को बनाते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा जायेगा कि आदिवासी समाज के अधिकारों का हनन नहीं हो। क्योंकि इस क्षेत्र में आदिवासी समाज बहुसंख्यक में है। इसलिये उनकी परम्परा, त्यौहार, उत्सव आदि का विशेष ध्यान रखा जायेगा।
पार्क के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जायेगा। पार्क के समीप ऐसी गतिविधियां चलाई जायेगी जिससे प्रकृति को भी नुकसान नहीं पहुंचे और आदिवासी समाज को भी रोजगार मिल सके। क्षेत्र में बाग प्रिंट को बढ़ावा दिया जायेगा और युवाओं का स्कील डेवलपमेंट किया जायेगा।
बैठक में सरदारपुर वन्यजीव अभ्यारण्य पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यह वन्यजीव अभ्यारण्य भी इको सेंसेटिव झोन के अंतर्गत होगा। इस वन्य जीव अभयारण्य में विभिन्न प्रकार के वन्यजीव जैसे लोमड़ी, बंदर, लंगूर, सियार सहित विभिन्न प्रकार के पक्षी भी होंगे। विशेषकर खरमोर पक्षी का संरक्षण किया जायेगा। इस क्षेत्र में खरमोर पक्षी विशेष रूप से पाये जाते हैं।
यहां टीक, बबूल, पलाश, अंजन जैसे कई पेड़ पौधों की विशाल श्रृंखला होगी। अभ्यारण्य में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जायेगा। पर्यटकों को आकर्षित करने के विशेष प्रयास किये जायेंगे। मालवा और निमाड़ की दृष्टि से सरदारपुर वन्यजीव अभ्यारण्य महत्वपूर्ण केन्द्र साबित होगा। यह जूलॉजी के विद्यार्थियों के सीखने के लिये महत्वपूर्ण केन्द्र बन सकता है। बैठक में संबंधित अधिकारियों ने भी अपने सुझाव रखे।